दिल की दहलीज

आदत हो चुकी थी , खामखा हसने की ,
ख़ुशी होने लगी थी , तुम्हारे दिल में बसने की ,
करामात देखो इस पागल दिल की ,
के खो गया है ये इश्क़ की वादियों में ,
हरियाली होनी चाहिए थी जहाँ ,
बंजर जमीन थी उन पहाड़ियों में !
कसम से कहते है , होती है ऐसी दिल की दहलीज़ ,
जिसे सिर्फ वहीं लाँघ सके ,
जो हो इस दिल के लिए बहुत अजीज !!

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